
पैसे लेकर भाभी की चुदाई कर दी
राधा… यह नाम सुनते ही मन में एक तस्वीर बन जाती है। राधा वर्मा… 30 साल की एक खूबसूरत हिंदुस्तानी औरत। उसकी शादी को 7 साल हो चुके थे। उसके पति राहुल एक छोटी कंपनी में क्लर्क की नौकरी करते थे। दोनों मुंबई के एक झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाके में रहते थे, जहाँ पानी की समस्या थी, बिजली कटती रहती थी, और हर महीने का किराया चुकाना मुश्किल होता जा रहा था।
राधा की खूबसूरती का जवाब नहीं था। गोरा रंग जैसे दूध में हल्दी मिला हो, 5’5″ की हाइट, भरा हुआ बदन जो किसी भी मर्द को दीवाना बना दे। उसके बाल काले और लंबे थे, हमेशा एक चोटी में बंधे। उसकी आँखें बड़ी-बड़ी, काली, जैसे कोहरे में डूबी हों। उसके होंठ मोटे, गुलाबी, किसी को भी चूमने को मजबूर कर दें।
उसका फिगर 36-28-38 का था – भरा हुआ बदन, कमर जैसे किसी ने हाथों से घुमाया हो, और उसकी गांड… वो तो एक अलग ही कहानी थी। गोल, उभरी हुई, जब वो चलती तो लहराती, हर मर्द की नज़र उसी पर टिक जाती।
लेकिन राधा की ज़िंदगी में खुशियाँ कम और गम ज़्यादा थे। उसके ससुराल वालों ने उसे कभी अपनाया नहीं। सास का ताना हमेशा सुनती – “बांझ है, कोई औलाद नहीं दे सकती।”
सात साल हो गए थे शादी को, लेकिन राधा के कोख से कोई बच्चा नहीं हुआ। डॉक्टरों ने कहा था कि राहुल की वजह से प्रॉब्लम थी, लेकिन समाज कहाँ समझता है? सारा इल्ज़ाम राधा पर ही आता था। पैसे लेकर भाभी की चुदाई कर दी
राहुल की नौकरी की हालत भी ठीक नहीं थी। उसकी सैलरी 15,000 रुपये महीने की थी, जिसमें से 8,000 किराए में चले जाते। बचे 7,000 में घर चलाना, दवाइयाँ, राशन… सब मुश्किल से मुश्किल होता जा रहा था।
उसके ससुर बीमार थे। उनके इलाज के लिए पैसे चाहिए थे। राहुल ने कर्ज़ लिया था, जो ब्याज पर ब्याज बढ़ता जा रहा था। साहूकार रोज़ आता था, गाली देता था, धमकाता था। एक दिन उसने कहा, “अगले महीने तक पैसे नहीं चुकाए तो घर से बेघर कर दूँगा।”
राधा रोज़ रोती थी। वो सोचती थी कि काश वो मर जाती, तो कम से कम इन मुश्किलों से तो छुटकारा मिलता। लेकिन वो जानती थी कि उसके पति उसे बहुत प्यार करते थे, और वो उन्हें छोड़कर नहीं जा सकती थी।
उसके पड़ोस में रहता था करण – 32 साल का एक अमीर आदमी। उसका अपना बिजनेस था, गाड़ी थी, बड़ा घर था। उसकी पत्नी विदेश में रहती थी, और वो अक्सर अकेला ही रहता था। पैसे लेकर भाभी की चुदाई कर दी
करण की आँखें हमेशा राधा पर टिकी रहती थीं। जब वो सुबह घर से निकलती, साड़ी में कमर हिलाती, पानी की बाल्टी लेकर जाती, तो करण अपनी खिड़की से उसे देखता। उसकी नज़रें उसके बदन पर घूमतीं – उसके उभरे हुए स्तन, कमर की मोहक लहर, और वो गोल गांड जो साड़ी में भी उभर कर आती।
राधा यह सब जानती थी, लेकिन वो अनदेखा करती। उसे पता था कि वो एक शादीशुदा औरत है, और उसे किसी और मर्द की तरफ देखना भी गुनाह है।
लेकिन ज़िंदगी की मुश्किलें बढ़ती जा रही थीं। एक दिन राहुल की नौकरी चली गई। कंपनी ने उन्हें निकाल दिया क्योंकि उनकी एफिशिएंसी कम हो गई थी – शायद तनाव की वजह से।
अब घर में खाने के लाले पड़ गए। राशन की दुकान वाले ने उधार देना बंद कर दिया। बिजली का बिल बकाया था, पानी का कनेक्शन काटने की धमकी आई। मकान मालिक रोज़ आता, गाली देता, धमकाता।
राधा ने कई जगह काम ढूंढने की कोशिश की। कहीं उसे काम नहीं मिला। कहीं लोग उसे गलत नज़रों से देखते, कहीं उसकी खूबसूरती ही उसके लिए मुसीबत बन जाती। पैसे लेकर भाभी की चुदाई कर दी
राहुल दिन-रात नौकरी ढूंढने निकलते। वो थक-हार कर आते, और राधा उन्हें देखकर रोती। एक रात राहुल बहुत देर से आए। वो शराब में धुत थे – पहली बार उन्होंने शराब पी थी।
“मैं नाकाम हूँ, राधा,” राहुल रोते हुए बोले। “मैं तुम्हें खुश नहीं रख सका। मैं तुम्हें बच्चा नहीं दे सका। मैं तुम्हें घर तक नहीं दे सका।”
राधा ने उन्हें गले लगाया। “नहीं, आप मेरे लिए सब कुछ हैं। हम मिलकर इस मुश्किल को पार कर लेंगे।”
लेकिन मुश्किलें और बढ़ीं। राहुल के पिता की तबीयत बिगड़ी। उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। ऑपरेशन के लिए 2 लाख रुपये चाहिए थे। कहाँ से लाते?
राधा ने अपने मायके में फोन किया। उसके पिता ने कहा, “बेटी, हमारी भी हालत ठीक नहीं है। तुम्हारे भाई की शादी में हमने कर्ज़ लिया है। हम मदद नहीं कर सकते।”
राधा टूट गई। वो रात भर रोती रही। सुबह जब वो उठी, उसकी आँखें सूजी हुई थीं, चेहरा पीला पड़ा हुआ था।
उसी दिन शाम को करण आया। उसने दरवाज़ा खटखटाया। राधा ने दरवाज़ा खोला – उसने एक पुरानी साड़ी पहनी थी, बाल खुले थे, और आँखों में आँसू थे। पैसे लेकर भाभी की चुदाई कर दी
करण ने उसे देखते ही कहा, “राधा जी, आप रो रही हैं? क्या हुआ?”
राधा ने कहा, “कुछ नहीं, बस आँख में कुछ चला गया था।”
करण ने कहा, “राधा जी, मैं जानता हूँ आपकी मुश्किल हालत। मैंने देखा है कि राहुल भाई नौकरी के लिए परेशान हैं। मैं मदद करना चाहता हूँ।” पैसे लेकर भाभी की चुदाई कर दी
राधा ने कहा, “नहीं, हम किसी से मदद नहीं मांगते।”
करण ने कहा, “राधा जी, मैं आपको सिर्फ पैसे नहीं देना चाहता। मैं एक सौदा पेश करना चाहता हूँ।”
राधा ने उसकी तरफ देखा। “क्या मतलब?”
करण ने अंदर आने का इशारा किया। राधा ने उसे अंदर बुलाया। वो बैठे, और करण ने कहा, “राधा जी, मैं आपको 5 लाख रुपये दे सकता हूँ।”
राधा चौंकी। “5 लाख? लेकिन क्यों?”
करण ने कहा, “उसके बदले में मुझे कुछ चाहिए।”
राधा समझ गई। उसका दिल धड़कने लगा। वो जानती थी कि यह क्या मांग है।
“मैं… मैं समझी नहीं,” उसने अपनी नज़रें झुकाते हुए कहा।
करण उठा और उसके पास आया। उसने उसका चेहरा उठाया। “राधा जी, आप बहुत खूबसूरत हैं। मैं आपको देखते ही दीवाना हो गया था। बस एक रात। 5 लाख रुपये। आपके ससुर का इलाज हो जाएगा, आपके कर्ज़ चुक जाएंगे, आपका घर बच जाएगा।”
राधा का दिल तेज़ी से धड़क रहा था। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे। लेकिन फिर उसे अपने ससुर का बीमार चेहरा याद आया, कर्ज़दारों की धमकियाँ याद आईं, खाली फ्रिज याद आया।
“मुझे… मुझे सोचने दीजिए,” उसने कहा।
“मैं कल शाम तक इंतज़ार करूँगा,” करण ने कहा और एक एडवांस के तौर पर 50,000 रुपये का एक बंडल टेबल पर रखकर चला गया।
राधा रात भर सो नहीं सकी। वो रोती रही। उसने सोचा, क्या यही उसकी किस्मत है? क्या एक औरत को अपनी इज़्ज़त बेचनी पड़ती है पेट भरने के लिए? लेकिन फिर उसने सोचा, यह उसके ससुर के लिए है, उसके घर के लिए है। अगर वो यह करेगी तो उसका ससुर बच जाएगा, उसका घर बचेगा।
अगली शाम, जब राहुल अस्पताल में अपने पिता से मिलने गए थे, करण आया। उसने दरवाज़ा खटखटाया। राधा ने दरवाज़ा खोला। उसने एक सुंदर साड़ी पहनी थी – लाल रंग की, जिसमें वो बेहद खूबसूरत लग रही थी। उसके बाल खुले थे, और हल्का सा मेकअप किया था।
करण की साँसें रुक गईं। “क्या आप…”
राधा ने सिर हिलाया। उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन वो रो नहीं रही थी।
करण ने बाकी के पैसे निकाले – 4.5 लाख रुपये। उसने वो राधा के हाथ में रखे। फिर उसने उसका हाथ पकड़ा और उसे अपनी ओर खींचा।
राधा का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। वो कांप रही थी। करण ने उसे अपनी बाहों में भर लिया। उसकी खुशबू… वो एक अमीर आदमी की महँगी परफ्यूम की खुशबू थी।
“डरो मत,” करण ने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा। “मैं तुम्हें दर्द नहीं दूँगा। बस… मुझे तुम्हारी खूबसूरती का मज़ा लेने दो।”
करण ने उसकी साड़ी का पल्लू हटाया। राधा ने आँखें बंद कर लीं। उसे अपने आप को दूर ले जाना था, इस पल से, इस हकीकत से। वो सोचने लगी कि यह कोई और है, यह वो नहीं है, यह कोई सपना है।
करण ने उसकी साड़ी खोलनी शुरू की। वो धीरे-धीरे उसके बदन को छू रहा था, जैसे कोई कीमती चीज़ को छूता है। राधा का बदन कांप रहा था। उसने कभी सोचा नहीं था कि उसे किसी अजनबी के सामने इस तरह उतरना पड़ेगा। पैसे लेकर भाभी की चुदाई कर दी
जब करण ने उसका ब्लाउज खोला, राधा की साँसें तेज़ हो गईं। उसने अपने हाथों से अपने बदन को ढकने की कोशिश की, लेकिन करण ने उसके हाथ हटा दिए।
“तुम बहुत खूबसूरत हो, राधा,” करण ने कहा। “तुम्हारा ये बदन… ये तुम्हारी पहचान है। इसे छिपाओ मत।”
करण ने उसे बिस्तर पर लिटाया। राधा की आँखों से आँसू बह रहे थे, लेकिन वो चुप थी। वो अपने पति को याद कर रही थी, अपनी शादी की रात को, जब उसने खुद को पहली बार किसी को सौंपा था। वो प्यार था, यह… यह तो बस एक सौदा था। पैसे लेकर भाभी की चुदाई कर दी
करण उसके ऊपर आया। उसने उसके हर हिस्से को छुआ, चूमा, महसूस किया। राधा के लिए यह दर्दनाक था, लेकिन वो सहन कर रही थी। वो सोच रही थी कि बस यह रात खत्म हो जाए, बस यह खत्म हो जाए।
“तुम्हारी साड़ी… यह तुम पर बहुत अच्छी लगती है,” करण ने कहा, उसके हाथ उसकी साड़ी पर घूम रहे थे। “लेकिन अब मुझे तुम्हारे असली फिगर देखना है।”
करण ने उसकी साड़ी पूरी तरह खोल दी। राधा सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। उसका बदन कांप रहा था, उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं।
करण ने उसका ब्लाउज खोला। राधा के स्तन बाहर आ गए – गोल, भरे हुए, गुलाबी निप्पल्स के साथ। करण की आँखें चमक उठीं। “वाह… क्या माल है तुम्हारा।”
उसने उसके स्तनों को हाथों में भर लिया। वो उन्हें दबाने लगा, मसलने लगा, निप्पल्स को उँगलियों से कसने लगा। राधा दर्द से चीखी, लेकिन उसने अपने होठों को काट लिया।
“अह्ह्ह… धीरे…” राधा ने कहा।
“शांत रहो,” करण ने कहा। “मज़ा लो। यह पैसे हैं जो तुम्हें मिल रहे हैं।”
करण ने उसके स्तनों को चूमना शुरू किया। उसने अपनी जीभ से निप्पल्स को चाटा, उन्हें मुँह में भरकर चूसा। राधा को अजीब लग रहा था – शर्मिंदगी, गुस्सा, और एक अजीब सी उत्तेजना भी।
फिर करण नीचे गया। उसने उसका पेटीकोट खोला। राधा अब सिर्फ पैंटी में थी। उसकी जांघें गोरी, मुलायम, बिल्कुल दूध जैसी थीं।
“क्या जांघें हैं तुम्हारी,” करण ने कहा। “मैं तो इन्हें चूमते रहूँगा।”
उसने उसकी जांघों पर किस करना शुरू किया, ऊपर से नीचे की तरफ बढ़ता हुआ। राधा कांप रही थी। उसे पता था कि करण कहाँ जा रहा है।
फिर करण ने उसकी पैंटी खोली। राधा की चूत सामने आई – गुलाबी, चिकनी, बिल्कुल साफ। करण की साँसें रुक गईं। “यह… यह तो जन्नत है।”
उसने उसकी चूत को छुआ। राधा कांप उठी। करण ने अपनी उँगली उसकी चूत पर फेरनी शुरू की, धीरे-धीरे, आहिस्ता-आहिस्ता। राधा को अजीब लग रहा था – उसका शरीर धोखा दे रहा था, उसे मज़ा आ रहा था।
“कितनी गीली हो गई हो,” करण ने कहा। “तुम्हें भी मज़ा आ रहा है ना?”
“नहीं… प्लीज़… जल्दी करो…” राधा ने कहा।
“अरे नहीं, जल्दी क्यों?” करण ने कहा। “मैं तो तुम्हें पूरा मज़ा दूँगा।”
करण ने अपनी उँगली उसकी चूत के अंदर डाली। राधा चीख उठी। “अह्ह्ह… दर्द हो रहा है…”
“पहली बार है क्या?” करण ने पूछा।
“नहीं… लेकिन… तुम अजनबी हो…” राधा ने कहा।
“अब अजनबी नहीं रहा,” करण ने कहा। “अब तो मैं तुम्हारा आशिक हूँ।”
करण ने अपनी उँगली अंदर-बाहर करनी शुरू की। राधा की साँसें तेज़ हो गईं। उसका शरीर कांप रहा था। करण ने दूसरी उँगली भी अंदर डाल दी।
“अह्ह्ह… बस… बस करो…” राधा ने कहा।
“अभी तो शुरुआत है,” करण ने कहा।
फिर करण ने अपना मुँह उसकी चूत पर रख दिया। उसने अपनी जीभ से उसे चाटना शुरू किया। राधा पागल हो गई। उसने कभी सोचा नहीं था कि कोई उसे इस तरह चाटेगा। उसका पति कभी ऐसा नहीं करता था।
“अह्ह्ह… हाह्ह… ओह्ह…” राधा की आवाज़ें निकल रही थीं।
करण ने उसकी चूत को पूरी तरह चाट लिया। उसने अपनी जीभ उसके छेद में डाली, अंदर-बाहर की। राधा की कमर उठने लगी। उसे मज़ा आ रहा था, और वो इसे रोक नहीं पा रही थी।
“प्लीज़… अब और मत तड़पाओ…” राधा ने कहा।
करण ने अपने कपड़े उतारे। उसका लंड बाहर आया – 8 इंच का, मोटा, काला, और पूरी तरह खड़ा। राधा ने उसे देखकर डर गई। इतना बड़ा… वो कभी नहीं देखा था।
“डरो मत,” करण ने कहा। “तुम्हें मज़ा आएगा।”
करण ने उसके पैर फैलाए। उसकी चूत पूरी तरह गीली थी, तैयार थी। करण ने अपने लंड का सुपारा उसके छेद पर रखा।
“तैयार हो?” करण ने पूछा।
राधा ने आँखें बंद कर लीं। उसने हाँ में सिर हिलाया।
करण ने एक ज़ोरदार धक्का लगाया। उसका लंड पूरी तरह अंदर घुस गया। राधा चीख पड़ी। “अह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द हो रहा है…”
“शांत रहो,” करण ने कहा। “अभी तो अंदर गया है। अभी तो चोदना शुरू करूँगा।”
करण ने धीरे-धीरे अपना लंड अंदर-बाहर करना शुरू किया। राधा दर्द से कराह रही थी। उसकी चूत कसी हुई थी, और करण का मोटा लंड उसे चीर रहा था।
“कितनी टाइट है तुम्हारी चूत,” करण ने कहा। “मज़ा आ रहा है।”
धीरे-धीरे दर्द कम होने लगा और मज़ा आने लगा। राधा की आवाज़ें बदलने लगीं। “अह्ह्ह… हाँ… ऐसे ही…”
“देखा? मज़ा आ रहा है ना?” करण ने कहा।
करण ने अपनी स्पीड बढ़ा दी। वो ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने लगा। राधा की चूत से आवाज़ें आ रही थीं – “फच्… फच्… फच्…”
“क्या चूत है तुम्हारी,” करण ने कहा। “मैं तो रोज़ तुम्हें चोदूँगा।”
“नहीं… यह… यह सिर्फ एक बार है…” राधा ने कहा।
“देखते हैं,” करण ने कहा और और ज़ोर से धक्का लगाया।
राधा की कमर उठने लगी। उसे मज़ा आ रहा था। उसका शरीर धोखा दे रहा था। वो अपने पति को भूल गई थी, अपनी शर्म को भूल गई थी। बस इस पल में खो गई थी।
“आह्ह… हाँ… और ज़ोर से…” राधा ने कहा।
करण ने उसके स्तनों को पकड़ लिया। वो उन्हें दबाते हुए चोदने लगा। राधा की चूत से पानी निकलने लगा। वो झड़ने वाली थी।
“मैं… मैं झड़ने वाली हूँ…” राधा ने कहा।
“झड़ जाओ,” करण ने कहा। “मैं भी झड़ने वाला हूँ।”
करण ने कुछ और ज़ोरदार धक्के लगाए और फिर अपना लंड अंदर ही छोड़ दिया। उसका गरम पानी राधा की चूत में भर गया। राधा भी उसी वक्त झड़ गई।
दोनों थक कर बिस्तर पर गिर पड़े। राधा रो रही थी – शर्मिंदगी से, गुनाह से, लेकिन एक अजीब सी संतुष्टि भी थी।
थोड़ी देर बाद करण फिर से तैयार हो गया। उसका लंड फिर से खड़ा हो गया था।
“अभी तो खत्म नहीं हुआ,” करण ने कहा। “अभी तो तुम्हारी गांड की बारी है।”
राधा डर गई। “नहीं… वहाँ मत डालो… बहुत दर्द होगा…”
“डरो मत,” करण ने कहा। “मैं आराम से करूँगा। और इसके लिए मैं और 1 लाख दूँगा।”
राधा चुप हो गई। उसे पैसों की ज़रूरत थी।
करण ने उसे घोड़ी बनाया। राधा अपने हाथों और घुटनों पर आ गई। उसकी गोल गांड हवा में थी। करण ने उसकी गांड को देखा – गोल, सफेद, बिल्कुल साफ।
“क्या गांड है तुम्हारी,” करण ने कहा। “मैं तो इसे देखते ही पागल हो गया था।”
उसने उसकी गांड को चूमना शुरू किया। फिर अपनी जीभ से उसके छेद को चाटा। राधा शर्मिंदा हो रही थी, लेकिन उसे अजीब लग रहा था।
फिर करण ने अपनी उँगली पर थूक लगाया और उसे उसकी गांड के छेद पर लगाया। धीरे-धीरे अंदर डाली।
“अह्ह्ह… दर्द…” राधा ने कहा।
“शांत रहो,” करण ने कहा। “अभी तो उँगली है।”
उसने उँगली अंदर-बाहर की। फिर दूसरी उँगली डाल दी। राधा की गांड थोड़ी ढीली हो गई।
फिर करण ने अपने लंड पर तेल लगाया। उसने उसे उसकी गांड के छेद पर रखा।
“तैयार हो?” करण ने पूछा।
“हाँ… लेकिन धीरे…” राधा ने कहा।
करण ने धीरे से धक्का लगाया। उसका लंड का सुपारा अंदर घुस गया। राधा चीख पड़ी। “अह्ह्ह… बहुत दर्द हो रहा है… निकालो…”
“थोड़ी देर में मज़ा आएगा,” करण ने कहा।
उसने धीरे-धीरे और अंदर धकेलना शुरू किया। राधा दर्द से कराह रही थी। उसकी गांड बहुत टाइट थी, और करण का मोटा लंड उसे चीर रहा था।
“कितनी टाइट गांड है तुम्हारी,” करण ने कहा। “मज़ा आ रहा है।”
आधा लंड अंदर जा चुका था। करण ने रुककर उसे आराम दिया। फिर थोड़ी देर बाद और अंदर धकेल दिया।
“अह्ह्ह… बस… बस…” राधा रो रही थी।
पूरा लंड अंदर घुस गया। करण ने कुछ देर रुके रहा। फिर धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया।
धीरे-धीरे दर्द कम होने लगा। राधा को अजीब सा मज़ा आने लगा। उसकी चूत फिर से गीली हो गई।
“अह्ह… हाँ… अब ठीक है…” राधा ने कहा।
“देखा? मज़ा आ रहा है ना?” करण ने कहा।
उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी। वो ज़ोर-ज़ोर से गांड मारने लगा। राधा की गांड से आवाज़ें आ रही थीं – “फच्… फच्… फच्…”
“क्या माल है तुम्हारी गांड,” करण ने कहा। “रोज़ मारूँगा इसे।”
“नहीं… यह… सिर्फ आज…” राधा ने कहा।
करण ने उसकी कमर पकड़ ली और ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने लगा। राधा की चूत से पानी टपक रहा था। वो झड़ने वाली थी।
“मैं… मैं फिर से झड़ने वाली हूँ…” राधा ने कहा।
“मैं भी…” करण ने कहा।
करण ने कुछ और धक्के लगाए और फिर अपना लंड गांड में ही छोड़ दिया। उसका गरम पानी राधा की गांड में भर गया। राधा भी झड़ गई।
दोनों थक कर बिस्तर पर गिर पड़े। राधा रो रही थी। उसे अपने आप से नफरत हो रही थी। लेकिन उसे पता था कि वो यह सब अपने परिवार के लिए कर रही थी।
सुबह जब करण गया, उसने राधा के गाल पर चूमा लगाया। “तुम अद्भुत हो। अगर कभी और पैसों की ज़रूरत हो, तो मुझे बताना।”
राधा ने पैसे उठाए। उसके हाथ कांप रहे थे। वो जानती थी कि यह उसकी ज़िंदगी का सबसे काला दिन था, लेकिन उसे यह भी पता था कि इसके बिना उसका परिवार बच नहीं सकता था।
राधा ने वो पैसे अपने पति को दिए, यह कहते हुए कि उसने अपने पिता से माँगे थे। राहुल खुश हो गया। उन्होंने अपने पिता का इलाज कराया, कर्ज़ चुकाए, और घर फिर से चलने लगा।
लेकिन राधा के अंदर एक खालीपन था जो कभी भर नहीं सकता था। वो रात उसके सपनों में आती थी। वो अपने आप को गंदा महसूस करती थी। अपने पति के साथ भी, जब वो करीब आते, उसे वो रात याद आ जाती थी। वो अपने पति से दूर होती जा रही थी, और वो समझ नहीं पा रहे थे कि क्या हुआ है।
राहुल ने नई नौकरी शुरू की, लेकिन राधा बदल गई थी। वो खुश नहीं रहती थी, हँसती नहीं थी। हमेशा उदास रहती, अपने कमरे में बंद रहती।
एक दिन राहुल ने पूछा, “क्या हुआ है तुम्हें? तुम पहले जैसी नहीं रहीं।”
राधा ने कहा, “कुछ नहीं, बस थकी हुई हूँ।”
लेकिन राहुल ने शक किया। उसने राधा के फोन में करण के मैसेज देखे। उसने राधा से सच पूछा। राधा रोती रही, लेकिन बोल नहीं पाई। राहुल ने उसे थप्पड़ मारा।
“तुमने मुझे बेच दिया! अपनी इज़्ज़त बेच दी!” राहुल चिल्ला रहा था।
राधा रोते हुए बोली, “मैंने तुम्हारे लिए किया था! तुम्हारे पिता के लिए किया था! तुम्हारी नौकरी गई थी, हमारे पास खाने को नहीं था!”
राहुल चुप हो गया। उसे समझ आया कि यह सब उसकी वजह से हुआ था। उसकी नाकामी की कीमत उसकी पत्नी ने चुकाई थी। उसे अपने आप से नफरत होने लगी।
लेकिन समाज कहाँ समझता है? पड़ोसियों को पता चल गया। वो बातें करने लगे। “वो राधा… देखो कैसी है… पैसों के लिए अपना बदन बेचती है।”
राधा घर से बाहर निकलना बंद कर दिया। वो अपने कमरे में बंद रहती थी। उसे डर लगता था लोगों की नज़रों से, उनकी बातों से।
उसके सास-ससुर ने उसे घर से निकालने की कोशिश की। “मेरी बहू वेश्या है,” सास कहती थीं।
राधा के माता-पिता भी उससे मुँह मोड़ गए। उनके लिए उनकी बेटी मर चुकी थी।
राधा अकेली पड़ गई। उसका पति उससे दूर हो गया, उसका घर टूट गया, उसका समाज उसे छोड़ गया। और वो? वो बस एक ज़िंदा लाश थी, जो साँसें ले रही थी लेकिन जी नहीं रही थी।
समय बीतता गया। राधा अपने पति के साथ ही रहती थी, हालाँकि उनके बीच वो रिश्ता नहीं रहा था जो पहले था। राहुल अब एक छोटी सी नौकरी करते थे, लेकिन उनमें वो जान नहीं थी।
एक दिन, करण फिर से आया। वो अकेला था, लेकिन इस बार उसके हाथ में एक बड़ा बैग था।
राधा ने दरवाज़ा खोला तो उसे देखकर उसका दिल रुक सा गया। वो कांपने लगी। “तुम… तुम यहाँ क्यों आए हो?”
करण ने मुस्कुराते हुए कहा, “राधा जी, मैं एक और ऑफर लेकर आया हूँ।”
“मुझे तुम्हारे कोई ऑफर नहीं चाहिए। मैंने वो दिन भूल गई हूँ। मुझे अकेला छोड़ दो,” राधा ने कहा, उसकी आवाज़ कांप रही थी।
“10 लाख,” करण ने कहा।
राधा चौंक गई। उसने उसकी तरफ देखा।
“10 लाख रुपये,” करण ने दोहराया। “सिर्फ एक रात के लिए। और… इस बार मुझे सिर्फ तुम्हारी ड्रेस और तुम्हारे फिगर चाहिए।”
राधा समझ नहीं पाई। “क्या मतलब?”
करण ने बैग खोला। उसमें से कई साड़ियाँ निकलीं – बहुत महँगी, बहुत खूबसूरत, लेकिन बहुत ही बोल्ड।
“मैं एक प्राइवेट फैशन शो करना चाहता हूँ,” करण ने कहा। “तुम्हें मेरी पसंद की यह साड़ियाँ पहननी हैं। और मेरे कुछ दोस्त आएँगे। वो तुम्हें देखेंगे, तुम्हारा फिगर देखेंगे। और फिर… एक प्राइवेट पार्टी।”
राधा ने मना किया। “नहीं, मैं यह नहीं कर सकती। मैंने वो दिन भूलने की कोशिश की है। प्लीज़, मुझे अकेला छोड़ दो।”
“सोच लो, राधा,” करण ने कहा। “10 लाख। तुम्हारा घर बच जाएगा। तुम्हारे पति की नौकरी लग जाएगी। तुम एक नई ज़िंदगी शुरू कर सकती हो। और इस बार सिर्फ एक रात, सिर्फ एक पार्टी।”
राधा रोने लगी। “तुम लोग मुझे क्यों नहीं छोड़ते? मैंने क्या बिगाड़ा है तुम्हारा?”
“कुछ नहीं,” करण ने कहा। “बस… तुम्हारी खूबसूरती ने मुझे दीवाना बना दिया है। मैं तुम्हें पाना चाहता हूँ। तुम्हारी ड्रेस, तुम्हारा फिगर… यह सब मुझे चाहिए।”
राधा ने दरवाज़ा बंद करने की कोशिश की, लेकिन करण ने रोक लिया। “एक बार साड़ी तो देख लो।”
उसने एक साड़ी निकाली – पूरी पारदर्शी, हल्की सी, जिसमें कुछ भी ढकने वाला नहीं था।
“यह… यह कैसी साड़ी है?” राधा ने कहा।
“यह एक आर्टिस्टिक साड़ी है,” करण ने कहा। “इसमें तुम्हारा फिगर पूरी तरह दिखेगा। तुम्हारे स्तन, तुम्हारी कमर, तुम्हारी गांड… सब कुछ। और मेरे दोस्त इसे देखेंगे।”
राधा ने मना किया। “नहीं, मैं यह नहीं पहन सकती।”
“20 लाख,” करण ने कहा।
राधा चौंक गई। 20 लाख… इतने पैसों से वो अपनी पूरी ज़िंदगी बदल सकती थी।
“20 लाख,” करण ने फिर से कहा। “बस एक रात। तुम्हारी ड्रेस, तुम्हारा फिगर। और फिर तुम आज़ाद हो।”
राधा सोचने लगी। उसे पता था कि यह गलत था, लेकिन 20 लाख… उसके पति की नौकरी, उसका घर, उसकी ज़िंदगी… सब कुछ बच सकता था।
“ठीक है,” राधा ने कहा। “लेकिन यह आखिरी बार होगा।”
“ठीक है,” करण ने मुस्कुराते हुए कहा। “यह आखिरी बार।”
अगली शाम, करण ने राधा को एक बड़े होटल के सुइट में बुलाया। वहाँ पहुँचने पर राधा देखा कि वो जगह बहुत आलीशान थी – शीशे, सुनहरा रंग, महँगी सजावट।
करण ने उसे एक कमरे में ले जाया जहाँ मेकअप का सामान रखा था। “पहले तैयार हो जाओ।”
राधा ने वो पारदर्शी साड़ी देखी। वो बहुत हल्की थी, लगभग दिखती ही नहीं थी। उसने कहा, “यह… यह तो कुछ भी नहीं ढकेगी।”
“बस यही तो चाहिए,” करण ने कहा। “तुम्हारा फिगर दिखना चाहिए। तुम्हारे स्तन, तुम्हारी कमर, तुम्हारी गांड… सब कुछ साफ दिखना चाहिए।”
राधा ने वो साड़ी पहनी। नीचे उसने एक छोटी सी पैंटी पहनी थी, लेकिन ऊपर ब्रा नहीं थी। साड़ी पूरी पारदर्शी थी, उसके गुलाबी निप्पल्स साफ दिख रहे थे। उसकी कमर, उसकी गांड… सब कुछ साफ झल रहा था।
“बहुत खूबसूरत,” करण ने कहा। “अब बाहर चलो।”
बाहर एक बड़ा हॉल था। वहाँ करण के 5-6 दोस्त बैठे थे – सब अमीर, सब बड़े-बड़े बिजनेसमैन।
जब राधा अंदर आई, सबकी नज़रें उस पर टिक गईं। वो साड़ी में इतनी सेक्सी लग रही थी कि सबके मुँह खुले रह गए।
“यह है राधा,” करण ने कहा। “देखो इसका फिगर।”
राधा ने साड़ी का पल्लू हटाया। उसके स्तन पूरी तरह दिख रहे थे, निप्पल्स खड़े थे। वो घूमी, उसकी गांड लहराई। सब तालियाँ बजाने लगे।
“क्या माल है,” एक ने कहा।
“इसका फिगर तो कातिल है,” दूसरे ने कहा।
“मैं तो इसे खरीद लूँ,” तीसरे ने कहा।
राधा शर्मिंदा हो रही थी, लेकिन वो खड़ी रही। करण ने उसे घुमाया, उसकी साड़ी के पल्लू से उसके स्तन ढके और फिर हटाए। सब तालियाँ बजाते रहे।
फिर करण ने उसकी साड़ी खोलनी शुरू की। वो धीरे-धीरे उसे खोलता गया, और राधा का बदन सबके सामने आता गया। पहले उसकी कमर, फिर उसकी गांड, फिर उसकी चूत जो पैंटी में ढकी थी।
“पैंटी भी उतारो,” एक दोस्त ने कहा।
राधा ने करण की तरफ देखा। करण ने हाँ में सिर हिलाया।
राधा ने अपनी पैंटी उतार दी। वो अब पूरी नंगी थी, सिर्फ साड़ी के पल्लू से ढकी हुई थी।
“घूमो,” करण ने कहा।
राधा घूमी। उसकी गोल गांड सबको दिखी। फिर करण ने पल्लू हटाया। राधा पूरी नंगी खड़ी थी, सबके सामने।
सब तालियाँ बजाने लगे। “शाबाश! क्या फिगर है!”
राधा की आँखों में आँसू थे, लेकिन वो खड़ी रही। उसे पता था कि यह सब 20 लाख के लिए था।
फिर करण ने उसे पास बुलाया। उसने उसे सोफे पर बिठाया। “अब मेरे दोस्त तुम्हें छू सकते हैं। यह भी डील में है।”
राधा डर गई। “नहीं… यह तो नहीं कहा था…”
“5 लाख और दूँगा,” करण ने कहा। “बस वो तुम्हें छूएँगे, कुछ नहीं करेंगे।”
राधा ने हाँ में सिर हिलाया। एक-एक करके सब दोस्त आए। उन्होंने उसके स्तनों को छुआ, उसकी चूत को छुआ, उसकी गांड को दबाया। राधा बस बैठी रही, आँसू बहाती रही।
“कितनी सॉफ्ट स्किन है,” एक ने कहा।
“इसके स्तन तो बहुत भारी हैं,” दूसरे ने कहा।
“इसकी गांड तो एकदम गोल है,” तीसरे ने कहा।
सबने उसे छुआ, महसूस किया, उसके फिगर का मज़ा लिया। फिर करण ने कहा, “बस, अब प्राइवेट पार्टी।”
बाकी दोस्त चले गए, लेकिन करण और उसके दो दोस्त रुके। करण ने राधा से कहा, “अब असली मज़ा शुरू होगा।”
राधा ने कहा, “क्या मतलब?”
“इस बार तीनों मिलकर तुम्हें चोदेंगे,” करण ने कहा। “तुम्हारी चूत, तुम्हारी गांड, और तुम्हारा मुँह… तीनों एक साथ।”
राधा डर गई। “नहीं… यह बहुत ज़्यादा हो गया… मैं यह नहीं कर सकती…”
“25 लाख,” करण ने कहा। “कुल मिलाकर 25 लाख। तुम्हारी पूरी ज़िंदगी बदल जाएगी।”
राधा सोचने लगी। 25 लाख… इतने पैसों से वो अपना घर खरीद सकती थी, अपने पति को अपना बिजनेस दे सकती थी, अपनी ज़िंदगी बदल सकती थी।
“ठीक है,” उसने कहा। “लेकिन यह सच में आखिरी बार होगा।”
“हाँ, यह आखिरी बार,” करण ने कहा।
तीनों मर्द उसके पास आए। राधा अभी भी नंगी थी। करण ने उसे बिस्तर पर लिटाया।
“पहले इसका मुँह चोदता हूँ,” एक दोस्त ने कहा।
उसने अपना लंड निकाला। 7 इंच का, मोटा। उसने उसे राधा के मुँह के पास लाया। “चूसो।”
राधा ने मना किया। “मैंने कभी नहीं किया…”
“सीख जाओगी,” उसने कहा और अपना लंड उसके मुँह में घुसा दिया।
राधा घुटने लगी। उसका लंड उसके गले तक जा रहा था। वो उल्टी करने लगी, लेकिन वो रुका नहीं। वो उसके मुँह को चोदने लगा।
“अह्ह्ह… क्या गरम मुँह है इसका,” वो बोला।
इस बीच करण ने उसकी चूत पर अपना लंड रखा। “मैं इसकी चूत में जाता हूँ।”
उसने एक धक्का लगाया और पूरा लंड अंदर घुसा दिया। राधा दर्द से चीखी, लेकिन उसका मुँह तो दूसरे के लंड से भरा था।
“अह्ह्ह… मुँह बंद करो और चूसो,” मुँह वाले ने कहा।
राधा ने चूसना शुरू किया। उसे अजीब लग रहा था, लेकिन वो कर रही थी। करण उसकी चूत को ज़ोर-ज़ोर से चोद रहा था। उसके धक्के तेज़ थे, गहरे थे।
“कितनी टाइट चूत है,” करण ने कहा।
“अब मैं इसकी गांड में जाता हूँ,” तीसरे ने कहा।
उसने अपना लंड तेल लगाकर उसकी गांड के छेद पर रखा। राधा डर गई। तीनों एक साथ… यह बहुत ज़्यादा था।
“प्लीज़… धीरे…” राधा ने कहा, लेकिन उसका मुँह फिर से लंड से भर गया।
तीसरे ने धक्का लगाया। उसका लंड उसकी गांड में घुस गया। राधा चीखी, लेकिन आवाज़ नहीं निकली।
अब तीनों लंड उसके अंदर थे – एक मुँह में, एक चूत में, एक गांड में। राधा को दर्द हो रहा था, लेकिन एक अजीब सा मज़ा भी आ रहा था।
तीनों एक साथ धक्के लगाने लगे। जब एक अंदर जाता, दूसरा बाहर आता। यह तालमेल बन गया। राधा की चीखें निकल रही थीं, लेकिन मुँह में लंड होने से वो दब रही थीं।
“फच्… फच्… फच्…” की आवाज़ें गूँज रही थीं।
“क्या माल है यह,” एक ने कहा।
“तीनों छेद एकदम टाइट हैं,” दूसरे ने कहा।
“मज़ा आ रहा है,” तीसरे ने कहा।
राधा की आँखों में आँसू थे, लेकिन उसका शरीर धोखा दे रहा था। वो झड़ने वाली थी। उसकी चूत से पानी निकलने लगा।
“देखो, यह तो झड़ गई,” करण ने कहा।
“रंडी है साली,” एक ने कहा।
राधा को वो शब्द अच्छे नहीं लगे, लेकिन वो कुछ नहीं बोल सकती थी। वो बस लेती रही और लेती रही।
10 मिनट बाद पहले ने अपना लंड मुँह से निकाला और उसके चेहरे पर झड़ दिया। गरम पानी उसके चेहरे पर गिरा।
फिर दूसरे ने गांड से लंड निकाला और उसकी गांड पर झड़ दिया।
अंत में करण ने चूत में ही झड़ दिया।
तीनों थक कर बिस्तर पर गिर पड़े। राधा भी थकी हुई लेटी थी। उसका बदन दर्द से कराह रहा था, लेकिन उसे पता था कि अब उसे 25 लाख मिलेंगे।
भाग 8: अंतिम भुगतान और नई ज़िंदगी
सुबह जब तीनों गए, करण ने राधा को 25 लाख रुपये का चेक दिया।
“तुम अद्भुत हो,” करण ने कहा। “अगर कभी और…”
“नहीं,” राधा ने कहा। “यह सच में आखिरी बार था। अब मुझे मेरे पति के पास जाना है।”
करण ने उसे देखा। “तुम्हारा पति तुम्हारी कदर नहीं करता। वो तुम्हें खुश नहीं रख सकता।”
“फिर भी वो मेरा पति है,” राधा ने कहा। “और मैंने यह सब उसी के लिए किया है।”
राधा ने पैसे लिए और घर आई। उसने राहुल को सब कुछ बताया। राहुल ने उसे गले लगाया।
“मुझे माफ़ कर दो,” राहुल ने कहा। “मैंने तुम्हें यह सब करने के लिए मजबूर किया। मैं नाकाम था, इसलिए तुम्हें यह रास्ता अपनाना पड़ा।”
राधा ने कहा, “अब यह सब भूल जाओ। हमारे पास पैसे हैं। हम नई ज़िंदगी शुरू कर सकते हैं।”
उन्होंने उन पैसों से एक छोटा सा घर खरीदा। राहुल ने अपना छोटा सा बिजनेस शुरू किया। राधा प्रेग्नेंट हो गई – इस बार राहुल के बच्चे से।
9 महीने बाद उन्हें एक बेटा हुआ। राधा बहुत खुश थी। उसे लगा कि उसकी ज़िंदगी अब ठीक हो गई है।
लेकिन वो रातें, वो दर्द, वो अपमान… यह सब उसे हमेशा सताता रहा। वो कभी-कभी रात को उठकर रोती। वो अपने आप को गंदा महसूस करती।
लेकिन फिर वो अपने बेटे को देखती और मुस्कुरा देती। उसने यह सब उसके लिए किया था। उसके लिए और उसके पिता के लिए।
समय बीता। राहुल का बिजनेस चल निकला। वो अमीर हो गए। राधा एक अच्छी ज़िंदगी जीने लगी।
लेकिन वो कभी भी अपने पति के करीब नहीं जा पाई। हर बार जब वो करीब आते, उसे वो रातें याद आ जातीं। उसे करण का चेहरा याद आता, उसके दोस्तों के लंड याद आते।
राधा ने कभी किसी को नहीं बताया कि उसने वो पैसे कैसे कमाए। वो यह राज़ अपने दिल में दफन करके रखेगी, हमेशा के लिए।
और करण? वो अपने पैसों और अपनी दौलत में अकेला रह गया। उसे कभी वो प्यार नहीं मिला जो राधा को अपने परिवार के साथ मिला। क्योंकि असली खुशी पैसों से नहीं खरीदी जा सकती।
राधा की कहानी यह बताती है कि ज़िंदगी में मुश्किलें आती हैं, गलत रास्ते आसान लगते हैं, लेकिन उनकी कीमत बहुत भारी होती है। एक औरत की इज़्ज़त, उसका सम्मान, उसकी आत्मा… यह सब पैसों से बहुत ज़्यादा कीमती है।
राधा ने अपनी ड्रेस बेची, अपना फिगर बेचा, अपनी आत्मा बेची… लेकिन आखिर में उसे वही मिला जो उसने खोया था – अपना परिवार, अपना घर, अपनी इज़्ज़त। लेकिन वो दाग हमेशा रहा, जो कभी धोया नहीं जा सकता।
New Sex Story :- देसी भाभी की चुदाई
New Sex Story :- शिक्षिका और छात्र की रोमांचक सेक्स कहानी